राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) द्वारा किए गए अभूतपूर्व विद्युत अधोसंरचना विकास से न केवल उपभोक्ताओं की संख्या में शानदार वृद्धि हुई है, बल्कि जिले में कृषि, उद्योग और घरेलू क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं।
विगत 25 वर्षों में जिले में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या में 145 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जहां 1998 में जिले में कुल 1,18,027 उपभोक्ता थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 2,51,353 हो गई है। विद्युत कनेक्शन भी 1,25,373 से बढ़कर 3,03,942 हो गए हैं, जिनमें विशेष रूप से कृषक उपभोक्ताओं की संख्या में 8 गुना वृद्धि हुई है। पहले जहां कृषक उपभोक्ता 7,308 थे, अब उनकी संख्या 52,336 हो गई है।
अधोसंरचना में अभूतपूर्व विस्तार
राजनांदगांव जिले में विद्युत आपूर्ति की निरंतरता और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए CSPDCL ने अधोसंरचना में भी कई गुना विस्तार किया है। पिछले 25 वर्षों में 132/33 के.वी. उपकेंद्रों की संख्या 1 से बढ़कर 4 हो गई है, जिनकी कुल क्षमता 40 एम.वी.ए. से बढ़कर 263 एम.वी.ए. हो चुकी है। इसके साथ ही 33/11 के.वी. उपकेंद्रों की संख्या 14 से बढ़कर 49 हो गई है। पॉवर ट्रांसफार्मरों की संख्या 20 से बढ़कर 115 हो गई, जबकि वितरण ट्रांसफार्मरों की संख्या 1,202 से बढ़कर 9,185 तक पहुंच गई है। उच्चदाब लाइनों की लंबाई 2020.03 किलोमीटर से बढ़कर 4822.74 किलोमीटर और निम्नदाब लाइनों की लंबाई 3461.94 किलोमीटर से बढ़कर 9699.22 किलोमीटर हो गई है।
गांव-गांव तक पहुंची बिजली, विद्युतीकरण शत-प्रतिशत
सीएसपीडीसीएल ने जिले के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए 3 जोन और 22 वितरण केंद्रों का निर्माण किया है, जिससे अब जिले के सभी गांवों का विद्युतीकरण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप 3,03,942 उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिल रही है, जिससे न केवल कृषि कार्यों में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण जीवन में भी गुणवत्ता सुधार आया है।
स्मार्ट मीटरों से सुविधाओं में सुधार
राजनांदगांव जिले में उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने के उद्देश्य से अब तक 2,37,430 स्मार्ट मीटर भी स्थापित किए जा चुके हैं। इससे उपभोक्ताओं को बिलिंग में पारदर्शिता, सटीकता और बिजली उपयोग के बारे में समय-समय पर जानकारी मिल रही है।
कृषि क्षेत्र को भी लाभ
जिले में सिंचाई पंपों की संख्या 8 गुना बढ़ी है, जिससे किसानों को सिचाई के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिल रही है और कृषि उत्पादन में भी सुधार हुआ है।

