राजनांदगांव। कुपोषित बच्चों के जीवन में सुधार लाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। यह जिम्मेदारी कलेक्टर जितेंद्र यादव ने अपने हाथों में लेकर दो अति गंभीर कुपोषित बच्चों की संपूर्ण देखभाल और उपचार की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली है।
कलेक्टर ने आज जिला पंचायत सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और एनआरएलएम की संयुक्त बैठक लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण संबंधी सभी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अति गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि कुपोषण से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों और फील्ड स्टाफ से समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा और प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को कुपोषण-मुक्त बनाने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। कलेक्टर ने महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और योग जैसी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया। जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रत्येक बुधवार योग और स्वास्थ्य परीक्षण आयोजित किए जा रहे हैं।
कलेक्टर ने नवजात शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में गलत दूध पिलाने और डकार न दिलाने को भी बताया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को माताओं को सही देखभाल और स्तनपान तकनीक सिखाने के लिए प्रदर्शन, वीडियो और मॉडल इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुरूचि सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनआर नवरतन, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती गुरूप्रीत कौर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

