राजनांदगांव। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ने जिले में मत्स्य क्रांति की नींव रखी है और इस योजना के जरिए किसानों और मछुवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। इस योजना के तहत जिले में मछली पालन की आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे मत्स्य उत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई है।
मछुवा परिवारों को मछली बीज, जाल, आइस बॉक्स, मोटर सायकल, पिकअप वाहन जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत मछुवारों को सस्ती और सुलभ ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। मछली पालन की आधुनिक तकनीकों के बारे में 1900 मछुवारों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे बेहतर तरीके से मछली पालन कर सकें।
जिले में मत्स्य बीज उत्पादन के लिए 2 नवीन हेचरी का निर्माण किया गया है, जिससे अब जिले को मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल होगी। इसके परिणामस्वरूप, जिले में मछली बीज उत्पादन में 20 प्रतिशत और मत्स्योत्पादन में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
जिले के खदानों और जलाशयों में 21 इकाई केज लगाकर मत्स्य पालन का कार्य शुरू किया गया है। इसके अलावा, मत्स्य बीज उत्पादन के लिए 3 प्रक्षेत्र एवं किसानों की निजी भूमि में 148 हेक्टेयर में 590.166 लाख रुपये की लागत से नवीन तालाब और संवर्धन पोखर निर्मित किए गए हैं। इन प्रयासों से जिले में 2500 से अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं।
इसके साथ ही, 11471 मछुवा हितग्राहियों को नि:शुल्क दुर्घटना बीमा प्रदान किया गया है। 1900 हितग्राहियों को मछली पालन की तकनीक की ट्रेनिंग दी गई है, और 450 हितग्राहियों को मछली जाल, आइस बॉक्स और मछली बीज वितरित किए गए हैं।
इस प्रकार, प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ने पिछले 2 वर्षों में जिले में मत्स्य क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है। योजना के प्रभाव से किसानों की आय, रोजगार और मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

