राजनांदगांव। जिले में कुपोषित बच्चों को सुपोषण की श्रेणी में लाने के लिए पोट्ठ लईका पहल अभियान के तहत आंगनबाड़ियों केन्द्रों में पालक चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। शिशुवती माताओं और नन्हे बच्चों का समय पर टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच आंगनबाड़ी केन्द्रों में किया जा रहा है। गंभीर कुपोषित बच्चों के गृह भेंट कर पौष्टिक आहार एवं साफ-सफाई के संबंध में समझाईश एवं जानकारी दी जाती है। गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी भेजने के लिए समझाईश दी जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा टीबी, कुष्ठ एवं पल्स पोलियों अभियान के अंतर्गत नारा लेखन कार्य कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पालक चौपाल कार्यक्रम में शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार, बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव तथा स्वच्छता, पेयजल, डायरिया प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
पोट्ठ लईका पहल अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में पालक चौपाल का आयोजन किया जाता है। पालक चौपाल में बताया जाता है कि बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकस के लिए जीवन के प्रथम 1000 दिन का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। पालक चौपाल में शिशुवती माताओं, किशोरी बालिकाओं को पौष्टिक भोजन और स्वच्छता के संबंध में जानकारी दी जा रही है। शिशुवती माताओं को बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए तिरंगा भोजन के रूप में पौष्टिक आहार खाने के लिए प्रेरित किया गया। जिससे बच्चों को प्रोटीन, विटामिन एवं अन्य पोषक तत्वों से भरपूर भोजन मिल सके। पालक चौपाल में तिरंगा भोजन के संबंध में अभिभावकों को जानकारी दी गई। तिरंगा भोजन में केसरी रंग अंतर्गत दलहन, सोया, अंडा, सफेद रंग चावल, रोटी तथा हरा रंग में हरी सब्जी जैसे पालक, मेथी, मुनगा भाजी एवं अन्य हरी साग-सब्जी का होता है। अपने बच्चों को पौष्टिक भोजन कम से कम 3 बार दिन में खिलाने और 2-3 बार स्वयं भी खाने की सलाह दी गई।

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