खैरागढ़। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होते ही सहकारी समितियों में मनमानी और अनियमितताओं का मामला उजागर हो रहा है। कई समितियों में बिना वास्तविक खरीदी के फर्जी बिल तैयार कर राशि निकालने का दबाव बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित मुढ़ीपार के अंतर्गत आने वाले भंडारपुर, ईटार, पाड़ादाह, चिचोला और गातापार जंगल समितियों में ऐसी गड़बड़ियों की लगातार सूचना मिल रही है।
समिति प्रबंधकों ने बताया कि धान खरीदी की अग्रिम राशि निकालने का कार्य उन्हीं के माध्यम से किया जाता है, लेकिन समिति अध्यक्ष और शाखा प्रबंधक की कथित मिलीभगत से फर्जी बिल तैयार कर उन्हें बैंक से राशि निकालने मजबूर किया जा रहा है। कई प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि किस सामग्री की खरीदी दिखाई गई है और किस दर पर बिल बनाया गया है।
धान खरीदी में सूखत क्षति या कमी (शार्टेज) की जिम्मेदारी समिति प्रबंधकों पर होती है, लेकिन सामग्री खरीदी के बिल अध्यक्ष द्वारा बनाकर उन्हें थमा दिए जा रहे हैं। कुछ समिति प्रबंधकों ने लगातार बढ़ते दबाव और गड़बड़ियों के कारण मानसिक तनाव की बात कही है।
इसके अलावा भूसा-सुतली की खरीदी भी शाखा प्रबंधक के निर्देश पर की गई बताई जा रही है, जबकि समितियों में भूसा की आवश्यकता ही नहीं है। बावजूद इसके खरीदी फड़ में अनावश्यक रूप से भूसा डाला गया। समिति प्रबंधकों का आरोप है कि शाखा प्रबंधक बिलों की लेन-देन (कमीशन) वसूलते हैं।

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