राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड अंतर्गत बोरतलाव के गांधीनगर क्षेत्र में रेलवे की नई रेल लाइन निर्माण कार्य के लिए किए गए मुरूम उत्खनन के बाद छोड़े गए गहरे गड्ढे में डूबने से तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मृत्यु अत्यंत हृदय विदारक एवं दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि घोर लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। जिला कांग्रेस कमेटी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतक बच्चों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करती है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग करती है।
जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अनीस खान द्वारा जारी बयान में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विपिन यादव ने कहा कि रेलवे निर्माण कार्य के लिए यदि संबंधित ठेकेदार द्वारा खेत से मुरूम का उत्खनन किया गया था, तो कार्य पूर्ण होने के बाद गहरे गड्ढे का समतलीकरण करना उसकी वैधानिक एवं नैतिक जिम्मेदारी थी। गड्ढे को खुला छोड़ देना गंभीर लापरवाही है, यदि समय रहते उसे भर दिया जाता अथवा सुरक्षा घेरा एवं चेतावनी संकेत लगाए जाते, तो तीन मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने मांग की है कि दोषी रेलवे ठेकेदार के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ रेलवे विभाग उसे तत्काल ब्लैकलिस्ट करे, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
विपिन यादव ने कहा कि इस मामले में केवल रेलवे का ठेकेदार ही नहीं, बल्कि खनिज विभाग एवं राजस्व विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए, यदि मुरूम उत्खनन की अनुमति दी गई थी, तो गड्ढे का समतलीकरण और सुरक्षा व्यवस्था क्यों सुनिश्चित नहीं की गई? और यदि बिना अनुमति उत्खनन हुआ, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? प्रथम दृष्टया संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर इतना बड़ा और जानलेवा गड्ढा लंबे समय से मौजूद था, वहां राजस्व विभाग के मैदानी अमले का नियमित भ्रमण होता है। पटवारी प्रतिवर्ष फसल संबंधी प्रतिवेदन एवं अन्य राजस्व कार्यों के लिए क्षेत्र का निरीक्षण करता है। ऐसे में इस स्थिति की जानकारी समय रहते संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची, यह भी जांच का विषय है।
जिला कांग्रेस कमेटी मांग करती है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। रेलवे के संबंधित ठेकेदार, कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों तथा जिन विभागों एवं अधिकारियों की लापरवाही सामने आए, उन सभी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक बच्चों के परिजनों को शासन के नियमानुसार अधिकतम आर्थिक सहायता एवं अन्य सभी पात्र राहत तत्काल उपलब्ध कराई जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उत्खनन स्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

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