राजनांदगांव। छुरिया विकासखंड का ग्राम घुपसाल जनभागीदारी और जल संरक्षण के सफल प्रयासों के चलते जिले में आदर्श मॉडल बन गया है। पिछले चार साल से सूखे तालाब इस साल भर गए और मवेशियों व ग्रामीणों के लिए जल उपलब्ध हुआ।
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने ग्राम का दौरा कर किसानों और स्वच्छता दीदियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि कम पानी वाली फसलें अपनाने और जल संरक्षण के उपायों से भू-जल स्तर में सुधार हुआ है। मक्का और दलहन-तिलहन जैसी फसलें अधिक पानी वाली धान की जगह उगाने से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि कृषि टिकाऊ भी हुई है।
इस वर्ष ग्राम के किसानों ने 300 एकड़ में मक्का और लगभग 50 एकड़ में दलहन-तिलहन की फसल बोई। ग्रामीणों की मांग पर पचरी, बोर और रोड निर्माण को भी स्वीकृति दी गई। कलेक्टर ने किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की पहल का भी जिक्र किया।
अध्यक्ष जिला पंचायत, श्रीमती किरण वैष्णव ने कहा कि ग्रामवासियों और महिला स्व-सहायता समूहों के संयुक्त प्रयासों से गांव में जल संकट कम हुआ है। पहले धान की अधिक पानी वाली फसलों के कारण गर्मियों में पानी की कमी होती थी, अब पर्याप्त जल उपलब्ध है।
पद्मश्री श्रीमती फूलबासन यादव ने कहा कि जल संरक्षण और फसल परिवर्तन के इस अभियान में पूरे गांव की भागीदारी प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बताया कि पानी का कोई विकल्प नहीं है और समय रहते सतत उपायों से ही भविष्य में संकट टाला जा सकता है।
ग्राम पंचायत सरपंच और किसानों ने बताया कि पहले मार्च माह के बाद तालाब, हैंडपंप और नालों में पानी नहीं रहता था, जिससे पेयजल संकट उत्पन्न होता था। इस वर्ष लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में मक्का और दलहन-तिलहन की फसल से भू-जल स्तर में सुधार हुआ और निस्तारी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है।
इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, सीईओ छुरिया श्री होरी लाल साहू, सरपंच श्री नरेश शुक्ला, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्राम घुपसाल का यह मॉडल अब जिले और प्रदेश के अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।

