राजनांदगांव। शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने पत्रकारवार्ता में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। अध्यक्ष जितेन्द्र मुदलियार ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर भ्रम फैला रही है, जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही संसद से पारित होकर कानून बन चुका है।
मुदलियार ने कहा कि भाजपा और उसके नेताओं द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि कांग्रेस और विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन नहीं किया, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। कांग्रेस लगातार महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और आगे भी रहेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में प्रस्तुत 131वां संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण से संबंधित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से परिसीमन और अन्य संशोधन लागू करने की कोशिश की गई। इसमें लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने तथा राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटों का प्रस्ताव रखा गया था।
मुदलियार ने कहा कि परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की जा रही है, जबकि आने वाले समय में नई जनगणना प्रस्तावित है। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण कानून बन चुका है, तो इसे तत्काल लागू करने में देरी क्यों की जा रही है।
इस पत्रकार वार्ता में पूर्व अध्यक्ष श्रीकिशन खंडेलवाल व रमेश राठौर, महामंत्री इकरामुद्दीन सोलंकी, प्रेम रुचंदानी, अशोक पंजवानी, मनीष गौतम, बृजेश श्यामकर, दैवेश वैष्णव, महेश यादव, वीरेंद्र चंद्राकर, शरद खंडेलवाल, अंकेश बाफना, चेतन भानुशाली, लक्ष्मण साहू, राजेश गुप्ता, गजेंद्र सिंह राजपूत, जय जायसवाल व अन्य उपस्थित थे।
श्रीकिशन खंडेलवाल ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन का इंतजार जरूरी नहीं है। मौजूदा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार यदि चाहे तो नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर इसे तुरंत लागू कर सकती है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि भाजपा की मंशा महिला आरक्षण लागू करने से अधिक परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की रही है, जिसे विपक्ष के विरोध के कारण पूरा नहीं किया जा सका।
पूर्व अध्यक्ष रमेश राठौर ने महिला आरक्षण के समर्थन में अपने पुराने प्रयासों का भी उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, पंचायत और नगरीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिलाने की पहल कांग्रेस सरकारों ने की थी। वर्ष 1989 में पहली बार पंचायतों और नगर पालिकाओं में एक-तिहाई आरक्षण का प्रस्ताव लाया गया था, जिसे बाद में 1993 में लागू किया गया। इसके चलते आज देशभर में बड़ी संख्या में महिलाएं स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं।
पत्रकारवार्ता में परिसीमन को लेकर भी सवाल उठाए गए। बृजेश श्यामकर ने कहा कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती है, जबकि नई जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में नए आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन होना चाहिए। साथ ही, यह भी कहा गया कि महिला आरक्षण को 2036 तक टालने के बजाय तत्काल लागू किया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का लाभ मिल सके।

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