राजनांदगांव। कलेक्टर जितेन्द्र यादव द्वारा आज कलेक्टारेट सभाकक्ष में शिशुवती माताओं को स्तनपान के सही तरीके और उसके लाभ की जानकारी देने तथा शिुश मृत्यू दर में कमी लाने के लिए महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कृत्रिम बेबी वितरण किया गया। जिले में स्वास्थ्य क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के लिए शिशुवती माताओं में स्तनपान को बढ़ावा देने शिशु मृत्यू दर को कम करने के उद्देश्य से कृत्रिम शिशु मानव आकृति के माध्यम से विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत उप स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों , आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं सामुदायिक स्थलों पर एक कृत्रिम शिशु मानव आकृति (कृत्रिम बेबी) की सहायता से माताओं को स्तनपान के सही तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर प्रेम प्रकाश शर्मा, नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि छः महीने तक केवल मां का दूध देना शिशु के समुचित विकास एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी उदेश्य से माताओं को न केवल स्तनपान के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही कंगारू मदर केयर, प्रमुख स्तनपान पोजीशन जैसे- कैडल होल्ड, क्रॉस-कैडल, फुटबॉल होल्ड, पोजीशन के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्तनपान से शिशु को पर्याप्त एवं संतुलित पोषण मिलता है। शिशु का शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर होता है। मां को स्तन संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। शिशु मृत्यु दर में कमी आती है। स्तनपान के दौरान लगाव यानी शिशु द्वारा स्तन को सही तरीके से पकड़ना बहुत जरूरी होता है। साथ ही बच्चे को स्तनपान पश्चात बच्चों को डकार दिलाना आवश्यक है। इसे पहचानने के कुछ स्पष्ट संकेत होते है। शिशु का मुंह चौड़ा खुला होता है। शिशु केवल निप्पल नहीं, बल्कि (निप्पल के आसपास का गहरा हिस्सा) भी मुंह मे लेता है। शिशु की ठुड्डी स्तन से लगी होती है। शिशु के होंठ बाहर की ओर मुड़े होते है। दूध पीते समय धीमी और गहरी चूसने की आवाज आती है। इस के साथ ही केवल निप्पल ही मुंह में होना, मां को तेज दर्द या घाव महसूस होना, शिशु का बार-बार स्तन छोड़ देना, दूध कम निकलना या शिशु का असंतुष्ट रहना, चूसने की आवाज स्मैकिंग जैसी होना गलत स्तनपान के संकेत है। एक कृत्रिम शिशु मानव आकृति के माध्यम से इन सभी पोजीशनों का व्यावहारिक प्रदर्शन कर माताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे वे इन्हे आसानी से समझकर अपनाएं। यह अभियान एक स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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