डोंगरगढ़। नगर में बढ़ते प्लास्टिक कचरे और पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए प्रशासन द्वारा पॉलीथिन के उपयोग पर सख्ती किए जाने के निर्णय का सामाजिक कार्यकर्ता विवेक मोनू भंडारी ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि शहर को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं की सहभागिता भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक नगरी होने के कारण डोंगरगढ़ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, विशेषकर मां बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रगिरी तीर्थ तथा आसपास के बाजारों में। ऐसे में एक अनोखी पहल के तहत दर्शनार्थियों को प्रेरित किया जा सकता है कि वे अपने साथ गार्बेज बैग रखें अथवा मंदिर ट्रस्ट समिति, नगर पालिका या सामाजिक संस्थाओं द्वारा यह उपलब्ध कराया जाए। श्रद्धालु मंदिर परिसर व सीढ़ियों के आसपास फैले कचरे को एकत्र कर डस्टबिन में डालें, जिससे धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखने में भी सहयोग मिलेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि स्वच्छता में योगदान देने वाले नागरिकों और श्रद्धालुओं को प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट, नगर पालिका या सामाजिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया जाए। इसके साथ ही नगर में स्वच्छता सर्वेक्षण सप्ताह आयोजित कर लोगों में स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। इस दौरान नगर के सबसे स्वच्छ 100 दुकानदारों को सम्मानित कर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
विवेक मोनू भंडारी ने यह भी कहा कि शहर के प्रमुख स्थानों, बाजारों और मंदिर मार्गों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए जाएं तथा लोगों को कचरा इधर-उधर न फेंकने के लिए लगातार जागरूक किया जाए। थोड़ी सख्ती और थोड़े प्रोत्साहन के साथ यह अभियान निश्चित रूप से सफल हो सकता है और इसके सकारात्मक परिणाम जल्द ही दिखाई देने लगेंगे।
उन्होंने सुझाव दिया कि नगर में स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने के लिए एक श्रद्धालु-एक स्वच्छता संकल्प जैसे अभियान की शुरुआत की जा सकती है। साथ ही स्वच्छ दुकान-सम्मान योजना शुरू कर पॉलीथिन का उपयोग बंद करने और अपनी दुकान के आसपास स्वच्छता बनाए रखने वाले दुकानदारों को सम्मानित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय युवाओं, स्कूली विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों को जोड़कर स्वच्छता मित्र स्वयंसेवक दल बनाया जाए तो यह अभियान और अधिक प्रभावी हो सकता है। युवाओं की भागीदारी से स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता तेजी से बढ़ेगी और डोंगरगढ़ शहर स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक नगरी के रूप में नई पहचान बना सकेगा।

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