राजनांदगांव। संस्कारधानी नगर में होली के अवसर पर आयोजित होने वाला पारंपरिक रंगोत्सव इस वर्ष भी भव्यता और अनुशासन के साथ मनाया जाएगा। कामठी लाइन स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर समिति द्वारा 04 मार्च को भगवान राधाकृष्ण की शोभायात्रा निकाली जाएगी। सुबह 9.20 बजे मंदिर परिसर से विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात भगवान को रथ पर विराजमान कर आरती पश्चात यात्रा प्रारंभ होगी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महापौर मधुसूदन यादव, विधायक प्रतिनिधि संतोष अग्रवाल, वरिष्ठ भाजपा नेता खूबचंद पारख, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष (केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) नीलू शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत तथा पूर्व महापौर श्रीमती हेमा देशमुख शामिल होंगे। सभी अतिथि भगवान की पूजा-आरती कर शोभायात्रा को विधिवत रवानगी देंगे।
समिति ने जानकारी दी कि 02 मार्च को होलिका दहन होगा। 03 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण इस वर्ष धुलेंडी (रंगोत्सव) 04 मार्च को मनाई जाएगी।
शोभायात्रा कामठी लाइन मंदिर से प्रारंभ होकर भारत माता चौक, हलवाई लाइन, आजाद चौक, सिनेमा लाइन, महाकाल चौक, जगन्नाथ मंदिर मार्ग, गौशाला पारा, तेली पारा, जैन दादा बाड़ी मंदिर, जैन मंदिर, रामदेव बाबा मंदिर, गंज बालाजी मंदिर, गंज लाइन, तिरंगा चौक, रामाधीन मार्ग, दासी श्याम गली होते हुए पुनः सत्यनारायण मंदिर पहुंचेगी। दोपहर लगभग 12.30 बजे समापन होगा।
लगभग चार दशक पूर्व विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष एवं मंदिर समिति के ट्रस्टी स्व. नथमल जी अग्रवाल की प्रेरणा से प्रारंभ यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ निभाई जा रही है। वृंदावन की तर्ज पर यहां भक्त और भगवान एक साथ रंग खेलते हैं।
मंदिर समिति द्वारा प्राकृतिक टेसू (पलाश) के फूलों गुलाब जल एवं इत्र से विशेष सुगंधित केसरिया रंग तैयार किया जाता है। लगभग 3000 लीटर रंग की व्यवस्था की जाती है, जो रथ से भक्तों पर फुहार के रूप में डाला जाता है।
गणेश विसर्जन झांकी की तर्ज पर भव्य चलित झांकी तैयार की गई है। स्थानीय कलाकारों द्वारा झांकी प्रभारी लक्ष्मण लोहिया के निर्देशन में इसका निर्माण किया गया है। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को एकरूपता के लिए साफा, पगड़ी या आकर्षक टोपी पहनाई जाएगी।
फागुन के सुमधुर भजनों के साथ युवक, बच्चे एवं बुजुर्ग नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल होंगे। नगर के सभी भजन गायक इस दौरान अपनी सुमधुर प्रस्तुति देंगे। पूरे मार्ग में नागरिकों द्वारा ठंडाई, मिठाई, फल एवं जलपान की व्यवस्था की जाएगी।
समिति ने स्पष्ट किया है कि शोभायात्रा में काले एवं तैलीय रंगों का प्रयोग पूर्णतः वर्जित रहेगा। केवल केसरिया, लाल एवं गुलाबी रंग एवं गुलाल का ही उपयोग किया जाएगा।
सत्यनारायण मंदिर समिति के अध्यक्ष अशोक लोहिया ने कहा, कि श्यह रंगोत्सव केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक है। जब से यह शोभायात्रा प्रारंभ हुई है, तब से होली के दौरान होने वाली अव्यवस्थाएं और अशोभनीय रंगों का प्रचलन कम हुआ है। आज लोग सुगंधित केसरिया रंग में शांतिपूर्ण और मर्यादित ढंग से होली मनाते हैं। शोभायात्रा में उपस्थित भगवान राधाकृष्ण के ऊपर कोई भी भक्त बिना किसी भेदभाव, ऊंच-नीच, अमीर-गरीब के रंग गुलाल एवं प्रसाद चढ़ाकर अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकते है। हमारा उद्देश्य है कि भक्त और भगवान के इस दिव्य मिलन के माध्यम से समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का संदेश पहुंचे।

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