रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ आगमन को लेकर नई उम्मीद जागी है।
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ अपने 25वें स्थापना दिवस को रजत जयंती के रूप में मना रहा है। इस अवसर पर नया रायपुर में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
छत्तीसगढ़ के वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव जनघोषणा पत्र-मोदी की गारंटी में एनएचएम संविदा कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान एवं नियमितीकरण (संविलियन) का उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर कर्मचारियों को विश्वास है कि प्रधानमंत्री के इस दौरे से उनके भविष्य को लेकर कोई सकारात्मक घोषणा हो सकती है।
प्रदेश में वर्तमान में लगभग 16,000 से अधिक एनएचएम संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, जो ग्रामीण-शहरी एवं सुदूर वनांचल क्षेत्रों में उपस्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में पिछले लगभग 20 वर्षों से सतत सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। कम वेतन और बिना सामाजिक सुरक्षा के बावजूद ये कर्मचारी आमजन को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैय्या कराते आ रहे हैं। लगभग दो माह पूर्व इन कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन किया था, जिसमें प्रमुख मांगें थीं-नियमितीकरण, सेवा शर्तों का सुधार सहित अन्य महत्वपूर्ण मांगें।
आंदोलन के पश्चात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से वार्ता एवं आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल स्थगित की गई थी। हालांकि अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। विशेष रूप से हड़ताल के दौरान बर्खास्त किए गए 25 कर्मचारियों की बहाली अभी भी लंबित है, जिससे कर्मचारियों में निराशा एवं आक्रोश की स्थिति बनी हुई है।
पूर्व आंदोलन के दौरान प्रदेश भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, केदार कश्यप सहित अन्य कई नेताओं ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर एनएचएम कर्मचारियों का समर्थन किया था।
एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी एवं प्रदेश प्रवक्ता पुरन दास ने कहा वर्ष 2023 के भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी के अंतर्गत एनएचएम कर्मचारियों के नियमितीकरण और समस्याओं के समाधान का वादा किया गया था। सरकार बने अब लगभग 22 माह हो चुके हैं, परंतु आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। जिस प्रकार शिक्षक कर्मियों का संविलियन एक समयबद्ध प्रक्रिया में किया गया था, उसी प्रकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों का भी संविलियन किया जाए, ताकि भाजपा सरकार की जनघोषणा पत्र का वादा एवं मोदी की गारंटी पूर्ण हो सके।

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