राजनांदगांव। जिला प्रशासन द्वारा संचालित पोट्ठ लईका पहल के माध्यम से कुपोषण मुक्ति की दिशा में लगातार सार्थक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। इस पहल अंतर्गत गंभीर कुपोषित बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें सुपोषित श्रेणी में लाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ग्राम करेठी निवासी श्रीमती यामनी साहू की मातृत्व यात्रा एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी बन गई है। श्रीमती यामनी साहू ने बताया कि यह उनकी पहली गर्भावस्था थी। इस दौरान उन्होंने मितानीन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों का पालन करते हुए पोषणयुक्त आहार को अपने दैनिक भोजन में शामिल किया तथा नियमित स्वास्थ्य जांच कराती रहीं। जांच के दौरान उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके गर्भ में जुड़वा शिशु हैं, जिसके बाद उन्होंने अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का विशेष ध्यान रखना प्रारंभ किया। प्रसव के पश्चात उनके दोनों शिशुओं का वजन 1 किलो 950 ग्राम एवं 1 किलो 820 ग्राम था, जो सामान्य से कम था। मितानीन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा उन्हें बताया गया कि दोनों शिशु कमजोर हैं एवं कुपोषण की श्रेणी में आते हैं। प्रारंभ में वे चिंतित हुई, किन्तु कार्यकर्ताओं ने उन्हें आश्वस्त करते हुए बताया कि उचित पोषण, नियमित स्तनपान एवं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार संभव है।
श्रीमती यामनी साहू ने प्राप्त मार्गदर्शन का गंभीरता से पालन किया। उन्होंने बच्चों को नियमित स्तनपान कराया, पोषक आहार दिया तथा स्वास्थ्य केंद्र में उनकी नियमित जांच करवाई। साथ ही वे जिला प्रशासन द्वारा संचालित पोट्ठ लईका पहल अंतर्गत आयोजित पालक-चौपाल में भी नियमित रूप से शामिल होती रही, जिससे उन्हें बच्चों की देखभाल एवं पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती पूर्णिमा कांडे द्वारा समय-समय पर उनके घर पहुंचकर बच्चों की देखभाल, साफ-सफाई एवं पोषण संबंधी सतत मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता रहा। निरंतर प्रयास एवं समुचित देखभाल के परिणामस्वरूप आज दोनों बच्चों का वजन बढ़कर 7 किलोग्राम एवं 7 किलो 100 ग्राम हो गया है और वे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। यह परिवर्तन पोट्ठ लईका पहल, मितानीन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समन्वित प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है। श्रीमती यामनी साहू ने बताया कि पोट्ठ लईका पहल अंतर्गत पालक-चौपाल से उन्हें अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से निरंतर सहयोग मिला, जिससे उनके बच्चों को नया जीवन मिला है। उन्होंने सभी माताओं से आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित पालक-चौपाल में नियमित रूप से शामिल होने तथा मितानीन दीदीयों से प्राप्त सेवाओं एवं सलाह का लाभ लेकर अपने बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को बेहतर बनाने की अपील की है।

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