राजनांदगांव। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि चारित्र ज्ञान कितना भी हो किन्तु अहंकार यदि है तो यही अहंकार पतन का कारण बनता है। यदि हम परिषह सहन कर सकते हैं तभी हम अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकते हैं।
जैन बगीचे में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि मनुष्य भव मिलना मुश्किल है। यह भव हमें मिला है तो हम इसका लाभ क्यों नहीं उठाते? धर्म-कर्म करोगे तो आत्म कल्याण के मार्ग में निश्चित ही बढ़ोगे। आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए सहनशील बनो और अपने को धीरे-धीरे मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ाओ।
इससे पूर्व उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को भव्य मुनि ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गुरु बहुत ही जानकर बनाओ। आपने यदि गुरु बना लिया तो उसे अपने आपको समर्पित कर दो। यह निश्चित मान लो कि आपने अपने आपको जिस दिन गुरु के सुपुर्द कर दियाए उस दिन से आपके गुणों में निखार आता जाएगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

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