राजनांदगांव। घटना डोंगरगांव के अरसीटोला की है, जहां ग्राम समिति और उनके चार पदाधिकारियों के द्वारा एक दंपत्ति को समाज से बहिष्कृत कर उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं उनकी झूठी शिकायत से दंपत्ति को नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा है। पीड़ित दंपत्ति पर बीस हजार रूपये दण्ड भरने का भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है। दण्ड की राशि न भरने पर और भी सख्ती दिखाने की धमकियां दी जा रही है। ग्राम समिति की लगातार प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित दंपत्ति ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा से कर न्याय की गुहार लगाई है।
एक ओर हम न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और संवैधानिक प्रावधानों के तहत समानता और स्वतंत्रता की दुहाई देते फिरते हैं, इन्हीं सब के बीच, आज भी अंधेर नगरी और चौपट राजा जैसे किस्से यदा कदा सुनाई दें रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला ग्राम समिति के तुगलकी द्बक्तरमान का आया है, जिसमें ग्राम समिति के द्वारा एक पीड़ित दम्पत्ति का हुक्का पानी बंद कर बार बार प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। इसमें पीड़ित कौशल कुंजाम ग्राम कोकपुर में रोजगार सहायक के पद पर एवं पीड़िता श्रीमती सरिता कुंजाम आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक-02 में कार्यरत् थी। झूठी शिकायत कर उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया गया।
अपनी शिकायत में पीड़ित दंपत्ति कौशलराम कुंजाम और श्रीमती सरिता कुंजाम ने लिखा है कि, नवनियुक्त ग्राम समिति के पदाधिकारी आरोपी लोकचंद मंडावी आत्मज बिसौहा मंडावी, कृपाराम लाउने आत्मज जगतराम लाउने, टीकमचंद आत्मज गोरेलाल, उदयराम आत्मज जैनराम गोंड द्वारा दंपत्ति को समाज से बाहर कर उनका हुक्का पानी बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं आरोपीद्वय द्वारा झूठी शिकायत कर दंपत्ति को नौकरी से भी निकलवा दिया है और अब दंपत्ति पर बीस हजार रूपये अर्थदंड भरने का दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़ित का आरोप है किए ग्राम समिति के पदाधिकारी कोई न कोई नया बहाना ढूंढकर उन्हें प्रताड़ित करने का अवसर ढूंढते रहते हैं और प्रताड़ित करने से बाज नहीं आते हैं। ग्राम समिति के उक्त आरोपी पदाधिकारी सरपंच पर जबरिया दबाव बनाकर उनकी स्वयं की जमीन में बने आठ कमरे के नवनिर्मित कॉम्प्लेक्स को जबरदस्ती नाप कराकर और षड्यंत्र के तहत उसे अवैध बताकर तुड़वा भी दिया गया। आरोपियों के द्वारा पहले तो दंपत्ति को यह झूठा भरोसा दिलाया गया कि, अगर दंपत्ति दस हजार रुपए दंड स्वरूप अदा करती है तो उनका नवनिर्मित कॉम्प्लेक्स नहीं तोड़ा जाएगा, किन्तु नवनिर्मित कॉम्प्लेक्स भी तोड़ दिया गया और कॉम्प्लेक्स तोड़ देने के बाद भी दस हजार रुपए दण्ड भरने का उन पर लगातार दबाव बनाया जाने लगा। दण्ड न भरने की स्थिति में समाज से बाहर कर हुक्का पानी बंद कर देने की धमकी भी दी गई और अंततः समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। आरोपी पदाधिकारियों का इतने से भी मन नहीं भरा तो दंपत्ति के ऊपर झूठी शिकायत कर नौकरी से निकलवा दिया गया। ग्राम समिति के पदाधिकारियों पर यह भी आरोप लगा है कि, गाँव की ही एक अन्य महिला श्रीमती रत्नाकला धनकर जो किए आंगनबाडी केन्द्र क्रमांक-01 में कार्यरत है। वर्ष 2024 में उनके ससुर की मृत्यु हो जाने पर उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होने का ग्राम समिति के द्वारा तुगलकी फरमान इस बात का हवाला देते हुए जारी कर दिया गया कि, वह इसाई धर्म को मानती है। ग्राम की आंगनबाडी सहयिका चित्ररेखा नायक एवं गीता उईके को भी रत्नाकला धनकर से बात करने की मनाही कर दी। इतना ही नहीं रत्नाकला धनकर से किसी भी व्यक्ति के द्वारा बात किए जाने पर ग्राम समिति ने पाँच हजार रूपये का अर्थदंड घोषित किया है।
पीड़ित ने बताया कि, एक मर्तबा रत्लाकला धनकर से बात करने के दण्ड स्वरूप, ग्राम समिति द्वारा आंगनबाड़ी में ताला जड़ दिया गया और पीड़िता सरिता कुंजाम को भी पिछले आठ महीने से नौकरी से निकलवा दिया गया। ऐसा नहीं है कि, ग्राम समिति केवल पीड़ित दंपत्ति को ही परेशान कर रही है गांव के कुछ और भी लोग उनके निशाने पर है। आंगनबाड़ी सहायिका चित्ररेखा नायक और गीता उईके को पांच हजार रूपये अर्थदंड देने का दबाव बनाया गया और समाज से बहिष्कृत कर देने का धौंस दिखाया गया, इस प्रकार से ग्राम समिति अपनी मनमानी पर उतर आई है और जैसा चाहे वैसा फैसला सुनाकर पीड़ित और अन्य परिवारों को बेवजह परेशान कर रही है। हद तो तब हो गई जब बीते दिनों पीड़ित दम्पत्ति को फिर से बैठक मे बुलाकर पुराने दण्ड का हवाला देते हुए पंद्रह हजार रूपये और पाँच हजार रूपये का अतिरिक्त अर्थदण्ड जोड़कर कुल बीस हजार रूपये वसूलने का जबरिया दबाव बनाया जा रहा है। इस प्रकार से एक के बाद एक नए-नए दण्ड पीड़ित दंपत्ति पर थोपे जा रहे हैं। ऐसे में जहां दम्पत्ति का रोजगार ही छीन गया है, ग्राम समिति के द्वारा लगाए गए अर्थदंड की भरपाई कैसे करेगा। एक वैसे ही उन पर रोजी-रोटी का संकट बना हुआ है और ऊपर से ग्राम समिति के एक के बाद एक तुगलकी फरमान से पीड़ित दंपत्ति और उनका परिवार आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
बहरहाल देखना यह है किए पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा और आरोपियों पर कब कार्यवाही होगी।

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